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Biography Of Mahatma Gandhi : महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Thursday, 26 March 2020
Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi Kaa Jiwan Parichay (महात्मा गाँधी का जीवन परिचय )

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय :-  Mahatma Gandhi भारतीय राजनीती में महत्यपूर्ण स्थान रखते है लेकिन उस से भी पहले पूरा देश उनको जिस सम्मान की दृश्टि से देखता है वैसा सम्मान ना तो किसी ओर व्यक्ति को मिला है और ना ही आने वाली कई शताब्दी तक मिलने की सम्भावना है।  राष्ट्रपिता के नाम से सुशोभित Mahatma Gandhi देश की अमूल्य धरोहर में से एक है क्युकी उनका सम्मान और उनके विचारो का अनुगमन ना केवल भारतीया करते है भारत  भी बोहत बारे संख्या में लोग Gandhi Ji के विचारो और कार्यो को सम्मान की दृस्टि से देखते है।  

Mahatma Gandhi Janm Or Pariwar :  महात्मा गाँधी जन्म और परिवार 

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi का पूरा नाम Mohan Daas Karamchand Gandhi था और  इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को Porbandar में हुआ था।  Mahatma Gandhi के पिता का नाम Karamchand Uttamchand Gandhi था।  उस समय के चलन के अनुसार Gandhi जी के पिता जी ने भी चार विवाह किया थे। पेसे से Karamchand Gandhi स्वयं नहीं जानते थे जब उनकी चौथी पत्नी अपने सबसे छोटी संतान को जन्म देगी तो वह पुत्र भारत की स्वत्रंता का प्रमुख पात्र बनेगा और इतिहास के पन्नो में स्वम् के साथ अपने परिवारों का भी नाम दर्ज करवाएगा।  वे एक सक्षम प्रशासक थे जो ये बात अच्छी तरह जानते थे की कैसे तत्कालीन सशक्त राजकुमारों के बिच में अपनी जगह बनानी है।  वे अपने उद्द्शेयो के साथ सत्ताधीन British  राज्याधिकरियो के पास कैसे अपनी पहचान बनानी है।  Mahatma Gandhi Ji की माता जी का नाम Putlibai Gandhi था।  Gandhi Ji की माताजी Putlibai ने अपना सम्पूर्ण जीवन धार्मिक कार्यो में हिन् व्यतीत किया।  उन्होंने कभी भी भौतिक जीवन में वस्तुओ को महत्वा नहीं दिया।  उनका ज्यादातर समय या तो मंदिर में या तो घरो के कार्यो में बीतता था।  वास्तव में  परिवार को समर्पित  आध्यात्मिक महिला थी। बीमार की सेवा करना व्रत उपासना करना उनके दैनिक जीवन में शामिल था।  इस तरह Gandhi Ji का परवरिस एक ऐसे माहौल में हुआ  जहाँ पर पारिवारिक एवं धार्मिक माहौल था और जैन धर्म का पालन होता था इसलिये वो शाकाहारी भोजन, अहिंसा , व्रत उपवास की जीवन शैली में विश्वास रखते थे , जिससे मन को शुद्ध किया जा सके।

Mahatma Gandhi Ke Prarambhik Jiwan Or Siksha: महात्मा गाँधी के प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Porbandar में शिक्षा की प्रयाप्त सुविधा ना होने के कारन Mohan Daas ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मुश्किल परिस्थिति में पूरी की थी।  उन्होंने मिट्टि में उंगचोर लियों से उकिर कर वर्णमाला सीखी थी , बाद में किस्मत से उनके पिता को राजकोट में दीवानी मिल गयी थी , जिस से उनकी समस्याएं काफी हद तक काम हो गयी थी।  Mohan Daas ने अपने  स्कूल के दिनों में काफी ईनाम जीते।  1887 में Gandhi Ji ने University Of Bombay से Matric का exam पास किया और भावनगर के रामलदास कॉलेज को join किया जहां पर उन्होंने अपनी मातृ भाषा गुजराती को छोर कर इंग्लिश सिखी जिस कारण  उनको Lecture सुनने में थोड़ी परेशानी भी हुई।  इसी दौरान उनका परिवार उनके भविष्यो को ले कर काफी चिंतित था क्युकी वो डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन वैष्णव परिवार होने के कारण वे डॉक्टर का काम नहीं कर सकते थे , इसलिये उनके परिवार वालो को लगा की उन्हें अपने परिवार की परंपरा को निभाते हुए Gujarat के किसी High Office में अधिकारी के पद पर लग्न होगा। इस लिये उन्हें Barrister बनना होगा। उस समय Mohan Dass भी Samaldas College से खुश नहीं थे , वे ये सुन कर खुश हो गए। उस समय के उनके युवा अवस्था ने भी उन्हें England के कई सपने दिखाये  थे। वैसे उनके पिता उनके लिया बोहत कम संपत्ति और पैसे छोर गए थे और उनकी माँ भी उन्हें विदेश भेजने से दर रही थी लेकिन Gandhi Ji अपने निर्णय पर अडिगड थे , उनके भइयो ने आवस्याक पैसे का इंतज़ाम किया और इस तरह सितम्बर 1888 को वो रवाना हो गए। वहां पहुंचने के दस दिनो बाद उन्होंने London Law Callege में  Inner Temple को Join किया। 

Gandhi Ji Ki Bharat Wapsi: गाँधी जी की भारत वापसी 

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

1891 में England से भारत लौटने पर उन्होंने वकालत में अपनी जगह बनाने की शुरुवात की और अपने पहले Court Case में वो बोहत नर्वस थे और जब जज  के सामने उनके  बोलने का  समय आया तो वह ब्लेंक हो गए और वो court से बहार आ गए।  इस कारण  उन्होंने अपने Clint को उसकी Fees भी लोटा दी। कुछ समय तक भारत में एक वकील के रूप में संघर्स करने के बाद South Affrica में इनको legal service का एक साल का contract मिला था , इस कारण  1893 को वो South Africa के लिए रवाना हो गए। वहां उन्हें रंग भेद  का सामना करना परा।  Durban के  Court में उनको पगड़ी उतारने के लिया कहा गया , उन्होंने मना कर दिया और उन्होंने court room छोर दिया।  7 जून 1893 को Train Trip के दौरान उनके जीवन में एक घटना घाटी जिसने उनकी ज़िन्दगी बदल कर रख दी। वो South Africa के trip पे जा रहे थे तभी  एक अंग्रेज़ ने उनके First Class Railway Compartment में बैठने पर आपत्ति की जबकि उनके पास  टिकट था और उन्होंने Train से उतरने के लिये मना  कर दिया इसलिये उन्हें किसी स्टेशन पर train से निचे फेक दिया गया उनका ये अपमान उन्हें अंदर तक प्रभावित कर गया और उन्होंने खुद को इस रंग भेद के विरुद्ध लड़ने के लिया तयार किया। उन्होंने उस रात ये प्रतिज्ञा ली की वो इस समस्या को जर से समाप्त कर देंगे।  इस तरह उस रात एक सामान्य आदमी से महानायक Gandhi का जन्म हुआ।  Gandhi Ji ने रंग भेद से लड़ने के लिये 1894 में नटाल इंडियन कांग्रेस की अस्थापना की।  एक साल की कॉन्ट्रैक्ट के बाद जब उन्होंने भारत लौटने की तैयारी शुरू की उसी से पहले ही नटाल असेम्बली ने भारतीयों को वोट देने से मना कर दिया , उनके साथियो ने भी उनके legislation के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिया आस्वस्थ किया।  इस तरह Mahatma Gandhi Ji  ने अंतराष्ट्रीय अस्तर पर इस मुद्दे को उठाया। 

Gandhi Ji Ke South Africa Ka  Safar  : गाँधी जी के साउथ अफ्रीका का सफर 


Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

कुछ समय तक भारत में रहने के बाद अपने पत्नी और बच्चो के साथ South Africa लौट गए।  वहां उन्होंने War के दौरान South Africa में British  सरकार की काफी मदद की थी ये उनका मत्त था की यदि भारतीय  British  Empire में अपना मुलभुत अधिकार चाहते है तो उन्हें भी अपने कर्तवो को पूरा करना होगा।  वास्तव में Gandhi Ji ने अपने जीवन में पहली बार South Africa में हिन् नागरिक समानता के लिया रैली निकली और अपने  Nonviolent Protest  को सत्याग्रह का नाम दिया जिस कारण  वहां उन्हें कुछ समय के लिये जेल भी हुई।  उन्होंने कुछ परिस्थितयो में British का Support भी किया। 

असहयोग, सत्याग्रह , अहिंसात्मक आंदोलन

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

1906 में Gandhi Ji  ने पहले अपने जीवन का असहयोग आंदोलन किया जिन्हे उन्होंने ने सत्याग्रह का नाम दिया। ये असहयोग आंदोलन South Africa के transvaal government में भारतीयों में लगाई लेन वाली पावंडियो पर था ,जिसमे हिन्दू विवाह को नहीं मानना भी सामिल  था। कई वर्षो तक चले इस संघर्ष में  सरकार  ने Gandhi Ji के साथ कई भारतीयों को जेल में डाल दिया था।  आख़िरकार दवाब के चलते South Africa की सरकार  ने Gandhi और general jan christian smuts के मध्य हुए समझौते को स्वीकार कर लिया था जिसके अनुसार वहां पर हिन्दू विवाह को भी मान्यता को स्वीकार किया और  भारतीयों के लिया Poll Tax को समाप्त किया। Gandhi Ji 1914 में जब भारत लोटे तब उस मठ ने लिखा था " संत ने हमारा साथ छोड़ दिया, मै हमेशा उनके लिए  प्राथना करता हुँ " | इसके बाद विश्व युद्ध प्रथम के समय Gandhi Ji  ने कुछ महीने London में बिताए थे। 

Champaran Aur Kheda Andolan: चम्पारण और खेडा आंदोलन 

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

1917  में Gandhi Ji ने British Land Lots के खिलाफ चम्पारण आंदोलन का नतृत्वा किया था। उस समय अंग्रेज़ो द्वारा निल की खेती के सम्बन्ध में किसानो पर जो Rules लगाए जा रहे थे उससे हार  कर आखिर में इन किसानो ने Gandhi Ji से सहायता मांगी थी , जिसका परिणाम अहिंसक आंदोलन के रूप में हुआ और जिसमे Mahatma Gandhi Ji की जीत हुई। 1918 में खेडा में जब बाढ़ आई तब वहां के किसानो को Tax में छूट की सख्त आवश्यकता थी, उस समय में भी Mahatma Gandhi Ji ने अहिंसक आंदोल के जरिए अंग्रेज़ो तक अपनी बात पहुचायी। इस आंदोलन में भी जनता का Gandhi Ji को भारी समर्थन मिला और अंततः मई 1918 में सरकार ने Tax में छूट दे दिया। और इस तरह Mahatma Gandhi Ji ने धीरे धीरे अंग्रेज़ो के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। 

भारत में Mahatma Gandhi का पहला अहसहयोग आंदोलन   

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1919 में भारत में जब British का शासन था तब Mahatma Gandhi राजनैतिक आंदोलन कर रहे थे। उस समय Rowlatt Act आया था जिसके अनुसार बिना किसी सुनवाई के क्रान्तिकारियो को सजा दी जा सकेगी , ऐसा प्रभ्धान अंग्रेज़ो ने बनाया था। Mahatma Gandhi जी ने इसका पूर्ण जोर विरोध किया।  उन्होंने इसके खिलाफ सत्याग्रह और शांतिपूर्व आंदोलन किये।  इसी दौरान Amritsar में जलीय वाला बाग़ हत्या कांड भी हुआ जिसमे ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल डायर ने सैकड़ो लोगो को गोली से भून दिया था। Mahatma Gandhi इस से बोहत नाराज़ हुए और उन्होंने British सरकार द्वारा भारतीयों को वर्ल्ड वॉर में भाग लेने की अनिवार्यता का भी विरोध किया।  इस तरह Gandhi Indian Home Rule Movement  का प्रमुख चेहरा बन गए और अंग्रेज़ो को सम्पूर्ण बहिस्कार का आह्वाहन किया। छात्रों को सरकारी स्कूल में ना जाने के लिए, सैनिको को अपना पद्द छोड़ने के लिए, नागरिको को Tax ना भरने के लिए और ब्रिटिश सामान ना खरीदने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने खुद भी ब्रिटिश द्वारा बनाये गए कपड़ो के अस्थान पर खुद चरखा लगा कर खादी का कपड़ा पहनने पर ध्यान केंद्रित किया  और यही चरखा जल्द हिन भारतीय स्वंत्रता का प्रतिक बन गया।  Mahatma Gandhi ने इंडियन नेशनल कांग्रेस की leadership की और होम रूल के लिए अहिंसा और असहयोग आंदोलन की नीव रखी। ब्रिटिश सरकार ने 1922 में Mahatma Gandhi Ji पर राष्ट्र द्रोह के तीन मुक़दमे लगा कर उन्हें अरेस्ट कर लिया और छे वर्ष के कारागार में दाल दिया और  Gandhi Ji  को उनकी आप्पांडिक्स सेर्जेरी  के बाद february 1924 में छोरा गया। 

नमक सत्याग्रह : Namak Satyagrah 

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

जब वह स्वतंत्र हुए तब उन्होंने देखा भारत में मुस्लिम हिन्दू एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो चुके है , इस लिए इस साल उन्होंने तीन महीने के लिया उपवास रखा उसके बाद वो आगामी कुछ सालो तक राजनीती से दूर हिन् रहे। 1930 में Mahatma Gandhi Ji ने वापस सक्रिय राजनीती में पदार्पण किया और उन्होंने ब्रिटिश सरकार का नमक आंदोलन का विरोध किया , इस एक्ट के अनुसार भारतीय ना नमक बना सकते थे और  ना बेच सकते थे और नमक पर भी कर लगा दिया गया।  जिसके कारण गरीब भारतीयों को समान समस्या का पालन करना पर रहा था। Mahatma Gandhi Ji ने इसका विरोध करने के लिए एक नए तरह का सत्याग्रह किया जिसमे वो 390 किलोमीटर चलकर अरेबियन सागर तक गए , वहां पर उन्होंने प्रतिकारात्मक रूप से नमक इकट्ठा किया। इस मार्च से एक दिन पहले हिन् उन्होंने लार्ड इरविन को लिखा था "मेरा उद्देस्या सिर्फ यही है की अहिंसात्मक तरीके से अंग्रेज़ो को समझाऊंगा की वे भारतीयों के साथ कितना गलत कर रहे है"। 12 मार्च के दिन Mahatma Gandhi ने एक धोती और सौल पहन कर लकड़ी के सहारे साबरमती से ये मार्च शुरू किया था। जिसके 24 दिन बाद वो दांडी पहुंचे और वहाँ उन्होंने वाष्पीकृत होने वाले समुंद्र जल से नमक बना कर अंग्रेज़ो के बनाये हुए नियम को तोड़ा। इस तरह इस नमक यात्रा से पुरे देश में क्रांति की लहर दौर गई , लगभग साठहजार भारतीयों को साल्ट एक्ट तोरने के जुर्म में जेल में डाला गया जिसमे Mahatma Gandhi  Ji खुद भी सामिल थे।  इसके कारण वो भारत में हिन् नहीं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए और 1930 में ही टाइम मैगज़ीने ने उन्हें "मेन ऑफ़ दी ईयर" का ख़िताब दिया। january 1931 में उन्हें जेल से छोरा गया और इसके दो महीने बाद उन्होंने लार्ड इरविन से समझौता किया और नमक सत्याग्रह समाप्त किया। इस समझौते के अनुसार हज़ारो राजनैतिक बंदियों को रिहा किया गया उसके साथ यह भी उम्मीद जगी की स्वराज के लिए यह सत्याग्रह निल का पत्थर साबित होगा। 
Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi Ji ने 1931 में लंदन में आयोजित इंडियन नेशनल कांग्रेस के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया , हलाकि ये कॉन्फ्रेंस निरर्थक साबित हुई। 1932 में Gandhi Ji लंदन से लोटे और उन्हें वापस जेल में दाल दिया गया।  उसके बाद Mahatma Gandhi Ji बहार आए तो 1934 में उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप छोर दी , उसकी जगह जवाहरलाल नेहरू ने संभाली।  और इस तरह Mahatma Gandhi Ji फिर से राजनीती से दूर हो गए।  उन्होंने अपना ध्यान शिक्षा , गरीबी,और कई अन्य समस्याए जो भारत की रूलर एरिया को प्रभावित कर रही है उसपर लगाया।

भारत छोड़ो आंदोलन : Bharat Choro Aandolan 

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1942 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। जब इस युद्ध में अँगरेज़ लगे हुए थे तब Mahatma Gandhi Ji ने भारत छोरो आंदोलन की शुरुवात की।  August 1942 में अंग्रेजो ने Gandhi Ji , उनकी पत्नी और उनके नेशनल कांग्रेस के अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।  इन सब को पुणे में रखा गया।  उन्नीस महीनो बाद   Mahatma  Gandhi को रिहा किया गया लेकिन उनकी पत्नी की मृत्यु जेल में हि हो गई। 1945 में जब ब्रिटिश के आम चुनाव में लेबर पार्टी ने churchill conservative party को हटा दिया तब इंडियन नेशनल कांग्रेस , मुस्लिम लीग के मोहम्मद अली जिन्ना ने देश की स्वंत्रता की मोहिम को और तेज कर दिया था जिसमे Mahatma Gandhi Ji ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन वो विभाजन को नहीं रोक सके और धर्म के आधार पर भारत दो टुकड़ो में भारत और पाकिस्तान में बट गया 

Gandhi Ji se jure kuch rochak tathya : गाँधी जी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य 

Biography Of Mahatma Gandhi :  महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi को अब तक पाँच बार नोबल प्राइज के लिया नामांकित किया जा चूका है और कमिटी इस बार के लिया अफ़सोस जाता चुकी है की इन्हे कभी भी अवॉर्ड नहीं मिला। Mahatma Gandhi Ji फोर कॉन्टिनेंट और ट्वेल्व देशो में सिविल राइट्स मूवमेंट के लिया जिम्मेदार थे , उनके लिया विश्व व्यापी सम्मान और उनकी अनुयाईओ की संख्या का अंदाजा इस प्रकार लगाया जा सकता है की Mahatma Gandhi की शव  यात्रा आठ किलोमीटर लम्बी थी। Mahatma Gandhi ने अपने जीवन में पाँच वर्ष फ्रूट्स , नट्स जैसे चीज़ो खा कर बिताये है और गिरते स्वस्थ के कारण उन्होंने ये छोर दिया था।  उन्होंने ने शुरू में दूध से बानी खाद्य सामग्री को भी स्वीकार नहीं किया था लेकिन बाद में ख़राब स्वास्थ के कारण उन्होंने बकरी का दूध पीना शुरू किया था। उनके बोहत सारे उपवासों को देख कर गवर्मेंट ने नुट्रिसिस्ट को यह बताने के लिए बुलाया था की Gandhi Ji बिना भोजन के 21 दिन तक कैसे रह सकते है।

Mahatma Gandhi Ki Hatya Kese Hui : गाँधी जी की हत्या कैसे हुई 

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30 January 1948 के दिन 78 वर्षीय Gandhi Ji जो की भूख हरताल से टूट चुके थे उन्होंने नई दिल्ली के बिड़ला हाउस गए ,  समय एक व्यक्ति  नाथूराम गोडसे पॉइंट ब्लैक रेंज में तीन बार गोली मार कर हत्या कर दी।  अहिंसा के इस पुजारी का हिंसा के साथ अंत होना पुरे देश के लिए एक दुःखद समाचार लेके आया।  नाथूराम गोडसे और उसके साथी को एक जुर्म में November 1949 में फांसी पर चढ़ाया गया और उनके साथ मिले अन्य साथियो को आजीवन कारावास का दंड सुनाया गया। Gandhi Ji के नाम पर देश विदेश में बोहत धरोहर है 
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